प्यार इक़रार ही नही...
इंकार भी है ।
प्यार साथ है...
तो कभी इन्तज़ार भी है ।
प्यार की इंतहा ना लीजिये...
इसमे जीत नही...
बस हार ही है ।
यहाँ खुशी की
नही है कीमत...
कभी ग़म को भी
तौलकर देखो ना...
यहाँ हँसी बेमानी है...
कभी साथ रोकर तो देखो ना ।।।
प्यार
मंज़र
काफ़िर है तू,
तेरी हस्ती ही क्या है ??
एक ख़्वाब से ज्यादा
तेरा मुक़द्दर क्या होगा ??
सोचता है तू, इक मंज़िल को पाकर,
कि,कायनात मिल गयी ।
किसे पता ??
उस मुक़ाम का
मंज़र क्या होगा ???
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