मंज़र

काफ़िर है तू,
तेरी हस्ती ही क्या है ??
एक ख़्वाब से ज्यादा
तेरा मुक़द्दर क्या होगा ??
सोचता है तू, इक मंज़िल को पाकर,
कि,कायनात मिल गयी ।

किसे पता ??
उस मुक़ाम का
मंज़र क्या होगा ???

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